ये वो साहित्यकार है जो दादरी पर प्रेस कांफ्रेंस कर अवार्ड वापस कर रहे थे, बंगाल पर चुप है

भारत में सेक्युलर की परिभाषा किसी से पूछे जाए तो कुछ ऐसी होगी हिन्दू होकर हिन्दू की बजाना और मुस्लिम के तलवे चाटना।
आज हम दो घटनाओं का जिक्र करेंगे जिससे यह साफ हो जायेगा की सेक्युलर लोग किस तरह अपना दोगला रविया भारत के लिए रखते हैं।
दादरी तो आप सबको याद ही होगा। दादरी में एक गौ मांस खाने वाले को अख़लाक़ को पूरे गांव ने मिलकर मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि ऐसी घटनाओं की हम निंदा करते हैं तथा किसी को भी कानून हाथ में नही लेना चाहिए। पर एक अख़लाक़ मरने से भारत असिहिष्णु हो गया। बड़े बड़े जानी मानी हस्तियां ये गाना गाने लग गए की भारत रहने लायक नही है उन्हें भारत में रहने पर डर लगता है। साथ में ही साहत्यकार लोग भी कुछ सामने आते हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आवर्ड वापस करते है उन्हें भी लगता है कि भारत अशिहिष्णु है। राजनीती भी गर्म की चरम पर थी।
अब दूसरी दो घटनाओं का जिक्र आपके सामने होगा कैराना और पश्चिम बंगाल।



किस तरह कैराना में 250 हिन्दू परिवारों को विशेष समुदाय के लोगो के डर से पलायन करना पड़ा उसके बाद बीते कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल में हिन्दुओ के शिव मंदिर पर हमला होता है हिन्दुओ को मारा जाता है 1000 से उपर हिन्दू मारे जाते हैं पर ना तो राजनीती गर्म हुई ना ही ये आवर्ड वापसी गैंग सामने आई। शायद ये लोग यह भूल गए की बंगाल भी भारत का ही अंग है और हिन्दू भी हिंदुस्तान के रहने वाले हैं। थोड़ी सी दया भी इन लोगो को नही आई।
आपको साफ कर दे तो जब इन्होंने आवर्ड वापसी की थी तो उस आवर्ड के साथ मिलने वाली लाखों रुपये से एक रूपये भी वापस नही की थी। सहत्यकारो का फ़िल्मी सितारो का यह दोगलापन किस लिए है।

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