मॉडर्न लोगों के कारण भारत में खो गए पत्तल, पर जर्मनी ने अब पत्तलों को अपना लिया

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अधिक पढ़े लिखे और अंग्रेजी बकने वाले मॉडर्न लोगों के कारण भारत का बहुतायत में नाश हुआ है भारतीयता का नाश हुआ है, संस्कृति का नाश हुआ है भारत में ऋषि मुनियों ने अनेकों परंपराएं शुरू की थी, जो की मनुष्य की सेहत लिए बेहद अच्छी थी, प्रकृति के लिए अच्छी थी पर अधिक पढ़े लिखे मॉडर्न लोगों ने भारत की धरोहर का तो
नाश ही कर दिया, और उन्ही में था “पत्तल”




पुरे भारत में पत्तों से बने बर्तनों जिन्हें पत्तल भी कहा जाता था, उनका इस्तेमाल होता था, शादियों में, अनेको फंक्शन में पत्तलों का इस्तेमाल होता था पर पत्तलों का इस्तेमाल करने पर अधिक पढ़े लिखे मॉडर्न लोग ठहाका लगाते थे, पत्तलों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को पिछड़ा हुआ गवार बताया जाता था, और हीन भावना में आने के कारण अब तो भारत से पत्तल लगभग लुप्त ही हो गए, कहीं नहीं इस्तेमाल होता पत्तल, अब डिस्पोजल इस्तेमाल किया जाता है, जो गलते ही नहीं, और प्रकृति का नाश करते है भले ही पत्तल को भारत में मॉडर्न लोगों ने समाप्त कर दिया, पर भारत की उसी पुरानी पहचान को अब बड़े बड़े मॉडर्न देशों ने अपना लिया और यूरोप का सबसे बड़ा देश यानि जर्मनी भी पत्तलों को अपना चूका है, यकीन नहीं आता तो देखें

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