ऐसा दिखता है भारत का आखिरी गांव, यहीं से पांडव गए थे स्वर्ग

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उत्तराखंड के बद्रीनाथ से 4 किलोमीटर की दूरी पर है भारत का आखिरी गांव माणा। चीन की सीमा पर उत्तराखंड का ये आखिरी गांव है। लोकेशन के अलावा इस गांव का ताल्लुक महाभारत काल से भी है। यहां ऐसी कहानी प्रचलित है कि इस गांव से होते हुए पांडव स्वर्ग गए थे। जानिए यहां से जुड़ी बातें…




– इस गांव का पौराणिक नाम है मणिभद्र, यहां टूरिस्ट अलकनंदा और सरस्वती नदी का संगम देखने भी आते हैं।
– इसके अलावा यहां गणेश गुफा, व्यास गुफा और भीमपुल भी देखने लायक हैं।
– मई से अक्टूबर महीने के बीच यहां बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं। यह समय माणा आने का सबसे बेहतर समय माना जाता है।
– छह माह तक इस गांव में खासी चहल पहल रहती है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाने पर यहां पर आवाजाही बंद हो जाती है।
भीमपुल से स्वर्ग गए थे पांडव…
– सरस्वती नदी पर भीम पुल है। जिसके बारे में कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्ग जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर सरस्वती नदी से जाने के लिये रास्ता मांगा।
– लेकिन सरस्वती नदी ने रास्ता देने से मना कर दिया तो भीम ने दो बड़ी शिलायें उठाकर इसके ऊपर रख दीं, जिससे इस पुल का निर्माण हुआ।
– इस पुल से होते हुए पांडव स्वर्ग चले गए और आज तक यह पुल मौजूद है।
सरस्वती नदी को यहीं मिला था श्राप
– यहां प्रचलित एक अन्य कहानी के मुताबिक, जब गणेश जी वेदों को लिख रहे थे तो सरस्वती नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी और बहुत शोर कर रही थी।
– गणेश जी ने सरस्वती जी से कहा कि शोर कम करें, मुझे कार्य में व्यवधान हो रहा है, लेकिन सरस्वती जी नहीं रुकीं।
– इससे रुष्ट होकर गणेश जी ने इन्हें श्राप दिया कि आज के बाद इससे आगे तुम किसी को नहीं दिखोगी।
व्यास गुफा…
– व्यास गुफा के बारे में बताया जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहां वेद, पुराण और महाभारत की रचना की थी और भगवान गणेश उनके लेखक बने थे। ऐसी मान्यता है कि व्यास जी इसी गुफा में रहते थे। वर्तमान में इस गुफा में व्यास जी का मंदिर बना हुआ है। व्यास गुफा में व्यास जी के साथ उनके पुत्र शुकदेव जी और वल्लभाचार्य की प्रतिमा है। इनके साथ ही भगवान विष्णु की भी एक प्राचीन प्रतिमा है।
कैसे पहुंचे माणा गांव…
हरिद्वार और ऋषिकेश से माणा गांव तक एनएच 58 के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार में है, जो यहां से 275 किमी है। यहां से आप बस, टैक्सी या कैब के जरिए माणा गांव पहुंच सकते हैं।

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