सिंधु जल समझौते पर आड़े आया चीन ,एकतरफा कदम नहीं उठा सकता है भारत

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दीपांजन रॉय चौधरी, नई दिल्ली
उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए सिंधु जल समझौते का सहारा लिया है। भारत की तरफ से इस समझौते को निरस्त करने के संकेत दिए गए हैं। पर ऐसा करना इतना आसान नहीं है। भारत, पाकिस्तान के अलावा इस समझौते के दूसरे हिस्सेदार भी हैं। इसके अलावा भारत की तरफ से उठाया गया कोई भी एकतरफा कदम चीन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसियों के साथ जल बंटवारे की व्यवस्था को प्रभावित करेगा।

भारत ने सिंधु जल समझौते के जैसा ही एक प्रस्ताव चीन को भी दिया है। इस प्रस्ताव में चीन ऊपरी नदी तट राज्य जबकि भारत निचला नदी तट राज्य है। निचले नदी तट राज्य के रूप में भारत चीन के साथ जल समझौता सुनिश्चित करना चाहता है। इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति में भारत सिंधु जल समझौते के निचले नदी तट राज्य पाकिस्तान के खिलाफ एकतरफा कदम उठाने के बारे में नहीं सोच सकता है।




उड़ी हमले के बाद उपजे तनाव के मद्देनजर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सार्वजनिक रूप से सिंधु जल समझौते को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यह एक तरफा मामला नहीं हो सकता। हालांकि नीति निर्माता इस समझौते को खत्म करने की हड़बड़ी में नहीं दिख रहे हैं। 1965, 1971 और 1999 के करगिल युद्ध हों या कश्मीर में आतंकवाद, यह समझौता बना रहा है।

चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर ऊपरी तट नदी राज्य की स्थिति में है। ऐसी स्थिति में चीन सैद्धांतिक रूप से कभी भी हाइड्रोलॉजिकल सूचनाएं रोकने के अलावा नीचे की तरफ नदी के बहाव में अवरोध खड़ा कर सकता है। चीन को लेकर ज्यादा डर इसलिए भी है क्योंकि पहले भी यह मुल्क अपने हाइड्रोप्रॉजेक्ट्स की जानकारी भारत के साथ साझा करने से इनकार कर चुका है। जब कभी जानकारी दी भी है, तो गलत दी है।

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